सुरवाणी-कथावनी-8 मन्दमतिर्नारायणः
१. “अयि बाल! किं त्वां व्यथयति?” इत्येकदा कयापि वृद्धया नारायणो नाम बालः पृष्टः। अरे बालक तुम क्यों दुखी हो ऐसा एक बार किसी वृद्धा ने नारायण नाम के बालक से पूछा। “O boy, what is paining you?” a boy named Narayana was asked by an old woman. ఓ పిల్లవాడా!ఏమిటి నిన్ను బాధిస్తున్నది? అని ఒకసారి ఎవరో ఒక వృద్ధురాలు నారాయణ అనే పేరుగల పిల్లవాణ్ణి అడిగింది. २. असौ कुमारः पुस्तकं हस्ते गृहीत्वा लोचनाद् दुःखाश्रूणि विमुञ्चन् गृहद्वारि निषण्णः आसीत्। यह बालक हाथ में पुस्तक लेकर आंखों से आंसू बहाता हुआ घर के द्वार के बाहर खड़ा था। That young one, holding a book in his hand, and tears rolling from his eyes, was sitting at the house entrance. ఆ పిల్లవాడు చేతిలో పుస్తకం పట్టుకుని కళ్ళనుండి దుఃఖాశ్రువులు కారుస్తూ ఇంటి ద్వారంలో నిలబడి ఉన్నాడు. ३. तदा तेन दारकेण भणितम्- “अम्ब, एतत्काव्यं कण्ठस्थं कर्तुम् अस्मद्-गुरुणा वयं सर्वे छात्रा आदिष्टाः। तब उस बालक ने उससे कहा माता यह कार्य याद करने के लिए हमारे गुरु जनों ने सभी छात्रों को आदेश दिया है। Then it was said by the boy- “Mother, we all students w...